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​॥ जीव दया सहयोग ॥ ​श्री वोकल माता नंदी गौशाला, तवाव 36 क़ौम समिति तवाव दानदाताओं की सेवा List तमाम पूरी XYZ

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  श्री वोकल माता नंदी गौ शाला 36 कौम समिति तवाव 💐💐💐💐💐💐💐 राशि के अनुसार व्यवस्थित पूर्ण दानदाता सूची (1-316) दिनांक: 30 मार्च 2026 बाकी न्यू लिखाना बाकी लिस्ट में  जो कल लिखकर दुबारा भेजी जाएंगी एक पूरी लिस्ट  💐💐💐💐💐💐💐 | S.No | दानदाता का नाम | राशि (₹) | स्टेटस/कोड | |---|---|---|---| | 1 | श्री रमेश भाई पुत्र उकाजी पुरोहित | 1,11,111/- | ✅ | | 2 | श्रीमती पाबू देवी w/o संग्रामजी पुरोहित (सोनाणी परिवार) | 51,000/- | | | 3 | स्वर्गीय श्री दलिचंद जी छोगाजी साकरिया जैन परिवार तवाव | 31,000/- | ✅ | | 4 | होली ढूंढ़ोत्सव वाघेला एवं मुशाला सोलंकी एवं परिहार परमार देवड़ा समस्त राजपूत परिवार तवाव | 30,000/- | ✅कैश | | 5 | श्री समस्त राजपुरोहित (लोपल परिवार) तवाव (मशीन हेतु) | 23,000/- | ✅ | | 6 | श्री अशोक भाई पुत्र श्री स्व जोराजी प्रजापत | 21,000/- | ✅कैश | | 7 | श्री भरत कुमार पुत्र श्री स्व सरूपाजी पुरोहित | 21,000/- | ✅ | | 8 | श्री मेरसिंहजी पुत्र श्री मोहब्बतसिंहजी वाघेला सोलंकी | 21,000/- | | | 9 | स्व. श्री प्रतापजी स्व. श्री धर्मा जी अमतोणी पुरोहित | 21,0...

🚩 आदि-तीर्थंकर परम पूज्य भगवान श्री ऋषभदेव जी की संपूर्ण पावन जीवन गाथा 🚩 "नमो अरिहंताणं, नमो सिद्धाणं"

 🚩 आदि-तीर्थंकर परम पूज्य भगवान श्री ऋषभदेव जी की संपूर्ण पावन जीवन गाथा 🚩 "नमो अरिहंताणं, नमो सिद्धाणं" ​1. जन्म की तिथि और स्थान ​तिथि: चैत्र कृष्ण नवमी (इसे आज भी ऋषभ जयंती के रूप में मनाया जाता है)। ​नगर: अयोध्या (कोशल देश)। ​नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा नक्षत्र। ​2. माता-पिता और वंश ​पिता: कुलकर नाभिराज (वे इस युग के अंतिम कुलकर थे)। ​माता: मरुदेवी माता। ​वंश: इक्ष्वाकु वंश (भगवान ऋषभदेव से ही इस महान वंश की शुरुआत मानी जाती है)। ​3. जन्म के समय की पौराणिक कथा ​प्राचीन कथाओं के अनुसार, भगवान के जन्म से पहले ही स्वर्ग के राजा इंद्र ने अयोध्या नगरी को रत्नों से सजाया था। उनके जन्म के समय कुछ अद्भुत घटनाएं हुई थीं: ​छह महीने पहले रत्नों की वर्षा: भगवान के गर्भ में आने से 6 महीने पहले ही कुबेर ने अयोध्या में प्रतिदिन 3.5 करोड़ रत्नों की वर्षा शुरू कर दी थी। ​माता के 16 स्वप्न: माता मरुदेवी ने अपने गर्भ में तीर्थंकर के आने से पहले 16 शुभ स्वप्न देखे थे (जैसे हाथी, बैल, सिंह, लक्ष्मी देवी आदि), जो इस बात का संकेत थे कि एक महान आत्मा का जन्म होने वाला है। ​सुमेरु पर्वत पर अभिषेक: जन्...

श्री वोकल माता नंदी गौशाला (36 कौम समिति) - आदर्श ग्राम तवाव

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​कोई विकल्प न होना: चूंकि पुरानी गौशालाओं में इन बेजुबान पशुओं को जगह नहीं मिली, इसलिए ग्रामीणों के पास अपनी और पशुओं की सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था। ​आवाज उठाना: जब किसी ने इन पशुओं की सुध नहीं ली और लगातार हादसे होते रहे, तब मातृशक्ति के कष्ट को देखकर युवाओं और 36 कौम के लोगों ने खुद जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। ​सच्ची सेवा का संकल्प: श्री वोकल माता नंदी गौशाला का जन्म किसी शौक से नहीं, बल्कि एक गंभीर आवश्यकता और "जीव दया" के सच्चे भाव से हुआ है ताकि भविष्य में फिर कभी किसी मां को ऐसी दुर्घटना का शिकार न होना पड़े। संस्था की स्थापना का मुख्य कारण ​अचानक हुई दुखद घटना: तवाव गांव में बस स्टैंड और सरकारी स्कूल के पास आवारा सांडों की आपसी लड़ाई के कारण दो महिलाएं, छैल कंवर और सीता देवी, गंभीर रूप से चोटिल हो गईं。 ​गंभीर चोटें: लड़ते हुए सांडों ने एक महिला को टक्कर मारकर करीब 4 फीट ऊपर उछाल दिया, जिससे उनके सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं और फ्रैक्चर हो गया。 ​प्रशासनिक अनदेखी: बार-बार सूचित करने के बाद भी जब स्थानीय प्रशासन और व्यवस्था...

श्री वोकल माता गौशाला तवावसमस्त ग्राम वासी युवाओ का साथ बेसहारा पशु का सहारा बनना

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  तवाव के युवाओं ने पेश की जीव-दया की मिसाल, मकर संक्रांति पर बेसहारा नंदी और बछड़ों को मिला सहारा ​तवाव (संवाददाता): RonsinghTawao मकर संक्रांति के पावन पर्व पर जहाँ लोग दान-पुण्य में व्यस्त थे, वहीं तवाव गाँव के युवाओं और समस्त ग्रामीणों ने मिलकर सामाजिक सरोकार की एक नई इबारत लिखी है। श्री वोकल माता गौशाला में आज सामूहिक सहयोग से उन बेसहारा नंदी और छोटे बछड़ों के लिए विशेष व्यवस्था की गई, जो अब तक सड़कों पर लावारिस घूमने को मजबूर थे। ​युवाओं की पहल से मिली नई राह ​इस नेक कार्य की विशेष बात यह रही कि गाँव के युवाओं ने नेतृत्व संभालते हुए घर-घर जाकर जनसंपर्क किया और ग्रामीणों को इस सेवा कार्य से जोड़ा। युवाओं के इसी जज्बे को देखते हुए ग्रामीणों ने भी मुक्त हस्त से 'तन-मन-धन' से योगदान दिया। आज मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर इन बेसहारा पशुओं को गौशाला में लाकर उनके चारे, पानी और सुरक्षा का संकल्प लिया गया। ​निःस्वार्थ सेवा ही मुख्य उद्देश्य ​गौशाला प्रबंधन और युवाओं ने बताया कि इस अभियान का एकमात्र उद्देश्य इन बेजुबानों की पीड़ा को कम करना है। बिना किसी राजनीतिक या व्यक्तिगत स्वार्थ ...

आज धरम जी 89 साल की उम्र में इस दुनिया को छोड़कर चले गए। धरम जी को नमन। और सैल्यूट, जो उन्होंने अनेकों फ़िल्मों से हम सभी का मनोरजंन किया। #Dharmendra

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 कहानी उस वक्त की है जब सनी देओल की पहली फिल्म बेताब रिलीज़ होने वाली थी। जिस दिन सनी देओल ने अपनी डबिंग कंप्लीट की उसी दिन धर्मेंद्र के पास फिल्म का प्रोमो भी आ गया। और उन्होंने जब वो प्रोमो देखा तो उन्हें बड़ा गुस्सा आया। जहां सनी देओल खुश थे कि अब जल्दी ही उनकी फिल्म रिलीज़ होगी। तो वहीं सनी की डबिंग सुनकर धर्मेंद्र का पारा हाई था। होता भी क्यों नहीं। सनी को लॉन्च करने के लिए वो कड़ी मेहनत कर रहे थे। फिल्म से जुड़ी एक-एक चीज़ पर बारीकी से नज़रें बनाए हुए थे। इसलिए जब उन्होंने सनी की वो डबिंग सुनी तो रात में ही उन्होंने सनी को अपने पास बुलाया। उन्होंने सनी को डांटते हुए कहा कि तुमने ज़रा भी मेहनत डबिंग पर नहीं की है। बहुत खराब डबिंग की है।    फिर रात को ही धर्मेंद्र ने सनी को अपने साथ डबिंग स्टूडियो लेकर गए। फिर पूरी रात धर्मेंद्र सनी के साथ बैठकर उनकी डबिंग कराते रहे। लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब धर्मेंद्र सनी से बोले,"ऐसे ही पूरी डबिंग करना। मैं घर जा रहा हूं।" सनी को लगा कि उनके पापा सच में चले गए हैं। चूंकि वो काफी थक चुके थे तो उन्होंने डबिंग करा रहे टैक्निशियन से कहा ...

#धर्मेंद्र #हेमा मालिनी #देओल परिवार

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  धर्मेंद्र दो दुनियाओं के मिलन बिंदु पर खड़े थे—लय में अलग, फिर भी उनके हृदय में मौजूद स्थिर, शांत शक्ति ने उन्हें एक सूत्र में पिरोया हुआ था। अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर के साथ, उन्होंने निष्ठा, गरिमा और पुराने ज़माने के मूल्यों पर आधारित एक नींव रखी। उन्होंने साथ मिलकर चार बच्चों—सनी देओल, बॉबी देओल, विजेता देओल और अजीता देओल—का पालन-पोषण किया और एक ऐसे परिवार का निर्माण किया जो शोरगुल से नहीं, बल्कि एकता से परिभाषित होता था। इसी घर से ऐसे बेटे निकले जिन्होंने पर्दे पर उनकी शक्ति और गरिमा की विरासत को आगे बढ़ाया, और ऐसी बेटियाँ जिनकी उपस्थिति सौम्य और ज़मीनी रही। 1980 में, हेमा मालिनी के साथ एक नया अध्याय शुरू हुआ, एक ऐसा मिलन जिसमें स्टारडम और ईमानदारी का मिश्रण था। बेटियों ईशा और अहाना देओल के साथ, धर्मेंद्र ने एक ऐसी दुनिया का निर्माण किया जहाँ कलात्मकता स्नेह से मिलती थी, और जहाँ ग्लैमर कभी भी परिवार और एकजुटता के मूल्यों पर हावी नहीं हुआ। सार्वजनिक रूप से दो परिवारों का प्रबंधन करना कभी आसान नहीं होता, फिर भी धर्मेंद्र ने इसे बिना किसी नाटकीयता के—केवल ज़िम्मेदारी, उपस्थित...

धर्मेंद्र जी का एक सच्चा फैन - 1350 किलोमीटर की अनोखी दीवानगी! 🤗

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 धर्मेंद्र जी का एक सच्चा फैन - 1350 किलोमीटर की अनोखी दीवानगी! 🤗 बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र जी के करोड़ों चाहने वाले हैं, लेकिन बीकानेर के प्रीतम जी जैसी दिवानगी शायद ही किसी में देखने को मिले। धर्मेंद्र जी के इस ज़बरदस्त फैन ने अपने आदर्श से मिलने के लिए 1350 किलोमीटर का लंबा सफर साइकिल से तय किया। बीकानेर से मुंबई तक का यह कठिन सफर केवल प्रेम, सम्मान और जुनून की वजह से पूरा किया गया।🙂 कहानी और खास तब हो जाती है जब पता चलता है कि यह सफर उन्होंने तब शुरू किया, जब उनके पसंदीदा हीरो अपना 75वां जन्मदिन मनाने वाले थे। अपने स्टार को बधाई देने का प्रीतम जी ने इतना अनोखा और दिल छू लेने वाला तरीका चुना कि बिना किसी हिचकिचाहट के बीकानेर से मुंबई की राह पकड़ ली।👍 प्रीतम जी की दीवानगी यहीं खत्म नहीं होती। उन्होंने अपनी इस श्रद्धा को हमेशा ज़िंदा रखने के लिए अपने शहर में एक खास स्टूडियो भी बनाया, जिसका नाम उन्होंने रखा - "धर्मेंद्र कलर लेब स्टूडियो"। यह नाम उनके दिल में बसे आदर और लगन का जीता-जागता सबूत है।👌 धर्मेंद्र जी के प्रति ऐसा समर्पण बहुत कम देखने को मिलता है। प्रीतम जी की यह...