श्री वोकल माता नंदी गौशाला (36 कौम समिति) - आदर्श ग्राम तवाव

​कोई विकल्प न होना: चूंकि पुरानी गौशालाओं में इन बेजुबान पशुओं को जगह नहीं मिली, इसलिए ग्रामीणों के पास अपनी और पशुओं की सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था।
​आवाज उठाना: जब किसी ने इन पशुओं की सुध नहीं ली और लगातार हादसे होते रहे, तब मातृशक्ति के कष्ट को देखकर युवाओं और 36 कौम के लोगों ने खुद जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया।
​सच्ची सेवा का संकल्प: श्री वोकल माता नंदी गौशाला का जन्म किसी शौक से नहीं, बल्कि एक गंभीर आवश्यकता और "जीव दया" के सच्चे भाव से हुआ है ताकि भविष्य में फिर कभी किसी मां को ऐसी दुर्घटना का शिकार न होना पड़े।

संस्था की स्थापना का मुख्य कारण
​अचानक हुई दुखद घटना: तवाव गांव में बस स्टैंड और सरकारी स्कूल के पास आवारा सांडों की आपसी लड़ाई के कारण दो महिलाएं, छैल कंवर और सीता देवी, गंभीर रूप से चोटिल हो गईं。
​गंभीर चोटें: लड़ते हुए सांडों ने एक महिला को टक्कर मारकर करीब 4 फीट ऊपर उछाल दिया, जिससे उनके सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं और फ्रैक्चर हो गया。
​प्रशासनिक अनदेखी: बार-बार सूचित करने के बाद भी जब स्थानीय प्रशासन और व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो ग्रामीणों और युवाओं में भारी रोष फैल गया。
​मातृशक्ति का बलिदान और युवाओं का संकल्प
​जोश का संचार: इन दोनों महिलाओं (मातृशक्ति) के साथ हुए इस हादसे और उनके द्वारा सहे गए कष्ट ने गांव के युवाओं के दिल को झकझोर दिया।
​संस्था का श्रेय: जैसा कि आपने बताया, इस गौशाला के निर्माण का पूरा श्रेय इन दोनों मातृशक्ति (छैल कंवर और सीता देवी) को जाता है, क्योंकि उनके साथ हुई इस दुर्घटना के बाद ही ग्रामीणों ने एकजुट होकर नंदी गौशाला बनाने का दृढ निश्चय किया。
​36 कौम की एकता: इस घटना के विरोध और समाधान के लिए पूरा गांव (36 कौम) एक साथ आया ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा हादसा न हो。
​गौशाला का मुख्य मकसद
​सुरक्षा: गांव की सड़कों, विशेषकर स्कूल और बस स्टैंड के पास से आवारा पशुओं को हटाकर उन्हें सुरक्षित आश्रय देना。
​सेवा: बेसहारा नंदी महाराज और गौवंश की उचित देखभाल, चारे और चिकित्सा की व्यवस्था करना。
​यह गौशाला आज न केवल पशुओं की सेवा कर रही है, बल्कि उस संकल्प का प्रतीक है जो तवाव के युवाओं ने अपनी मातृशक्ति के सम्मान और सुरक्षा के लिए लिया था।


श्री वोकल माता नंदी गौशाला (36 कौम समिति) - आदर्श ग्राम तवाव



 * स्थापना और आधार: इस संस्था की स्थापना 6 जनवरी 2026 को उन मातृशक्ति (छैल कंवर और सीता देवी) के बलिदान स्वरूप हुई, जिन्होंने सांडों के आपसी संघर्ष में गंभीर चोटें सही थीं। चूँकि पूर्व की गौशालाओं में इन नंदियों को स्थान नहीं मिला, अतः पूरे गाँव ने एकजुट होकर स्वयं के बलबूते यह मार्ग चुना。

 * 36 कौम की एकता और 'हम' का भाव: यहाँ 'मैं' (अहंकार) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। कोई यह नहीं कहता कि "मैंने किया," बल्कि सभी का एक ही मंत्र है— "हम सब मिलकर करते हैं"। इसी एकता के कारण '36 कौम एकता जिंदाबाद' का नारा आज तवाव की पहचान बन गया है।

 * जन-सहयोग और दान की महिमा: आज देश और परदेश (प्रवासी बंधु) से अनेक दानदाता अपनी स्वेच्छा से आगे आकर सेवा कर रहे हैं। लोग अपने जीवन के विशेष अवसरों को इस गौशाला से जोड़कर मनाते हैं, जैसे:

   * बच्चों और परिजनों के जन्मदिन के अवसर पर दान।

   * शादी की वर्षगाँठ और शुभ प्रसंगों पर सहयोग।

   * अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि की स्मृति में सेवा।

   * नई दुकान के शुभ मुहूर्त, नई गाड़ी या शुभ यात्रा की शुरुआत पर आशीर्वाद के रूप में सहयोग।

   * कई गुप्त दानदाता 'राम भरोसे' (बिना नाम बताए) भी बड़ी श्रद्धा से चारा और लाडू की व्यवस्था करते हैं।

 * आदर्श ग्राम तवाव: तवाव का नाम आज एक 'आदर्श ग्राम' के रूप में सम्मान से लिया जाता है क्योंकि यहाँ के निवासी बड़े आदर्शों वाले हैं। वे न केवल इंसानों के प्रति बल्कि बेजुबान जीव-जंतुओं के प्रति भी दया और कर्तव्य का भाव रखते हैं।

> मुख्य उद्देश्य: गाँव की सुरक्षा सुनिश्चित करना, बेसहारा नंदियों को सम्मानजनक जीवन देना और समाज में बिना किसी भेदभाव के सेवा और एकता की मिसाल 


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